Monday, 13 April 2015

दूरी = 1600 कीमी

"​वो गोल्ड्ने कलर वाली घड़ी क्या हुई? तुम आज-कल पहनती नहीं हो."
"अरे वो छोटी को दे दी न. पिछले दफा घर गयी थी तो वो पहन के कॉलेज चली गयी थी एक दिन. उसे अच्छा लगा. तो मैंने उसके पास हो छोड़ दी."
"तुम ऐसा कैसे कर सकती हो. तुमको पता है मैंने तुमको वो घड़ी अपने स्कॉलरशीप के पैसे से दी थी?"
"तो क्या हुआ. अब तो आप मुझे जब चाहें तब घड़ी दे सकते हैं. अब तो सैलरी है. आप भी न. कैसी-कैसी बात करते हैं. "
"ऐसा कैसे हो सकता है. जिंदगी का पहला स्कॉलरशीप था. अपने लिए कुछ नही खरीदा। माँ, पापा, भाई, बहन किसी के लिए कुछ नहीं। बस तुम्हारे लिए ही कुछ खरीद पाया. तुम ऐसे कैसे दे दोगी अपनी छोटी बहन को. उसे दुसरा खरीद देते."
"हाँ मैं दे दूंगी। क्यूंकि आपको नही पता है."
"क्या नहीं पता है मुझे."
"यही की मुझे इंजीनियरिंग कराने के लिए मेरे भाई-बहन के हिस्से से कितना काटा गया है. उनके लिए दूध का पैसा मेरे इंस्ट्रूमेंट में लगा, उनके सब्जियों का पैसा मेरे किताब में लगा, होली में उनके कपडे का पैसा मेरे लिए इंटरनेट कनेक्शन लेने में लगा. मेरा लैपटॉप खरीदने के बाद मेरी बहन को छह महीने दो सेट सलवार कमीज पे गुजारने पड़े. मैं आज यहाँ हूँ, और अगले हफ्ते आपसे मिलने आ रही हूँ तो उसके लिए मेरी बहन, भाई, मॉं, पापा सबको कम्प्रोमाइज करना पड़ा है. ताकि मेरी पढाई में कम्प्रोमाइज न हो. मेरे पास जो सामान है वो मैं उनको दूंगी। चाहे वो आपकी स्कॉलरशीप से हो, आपकी पहली कमाई से हो, आपको मिला हुआ कोई गिफ्ट हो या खुद आप ही हों. मेरी बहन को जो पसंद हो मैं उसको दे दूंगी. बिना आपसे पूछे. आपको करनी है शादी तो कर लो किसी और से. "
"क्या बोली? उसे पसंद हूँ तो मुझे भी तुम उसको दे दोगी?"
"ज्यादा स्मार्ट मत बनिए. मुँह देखे हैं अपना. उसको पसंद हैं तो. फ़ोन रखिये वरना नाक तोड़ दूंगी।"
"ये 1,600 कीमी दूर से नाक कैसे तोडा जाता है जी?"
"ये 1,600 कीमी  आने में कितनी देर लगता है?"